شرح مثنوى - شهيدى، سید جعفر - الصفحة ٦٢ - باقى قصه اهل سبا
باقى قصّه اهل سبا
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آن سبا ز اهلِ صبا بودند و خام |
كارشان كفرانِ نعمت با كِرام |
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باشد آن كفران نعمت در مثال |
كه كنى با مُحسنِ خود تو جدال |
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كه نمىبايد مرا اين نيكوى |
من به رنجم زين، چه رنجم مىشوى؟ |
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لطف كن اين نيكوى را دور كن |
من نخواهم چشم[١] زودم كور كن |
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پس سبا گفتند باعِد بَينَنَا |
شَينُنا خَيرٌ لَنا خُذ زَينَنا |
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ما نمىخواهيم اين ايوان و باغ |
نه زنان خوب و نه أمن و فراغ |
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شهرها نزديك همديگر بَد است |
آن بيابان است خوش كآنجا دد است |
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يَطلُبُ الإنسانُ فِى الصَّيفِ الشِّتا |
فَإذا جَاءَ الشِّتا أنكَرَ ذا |
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فَهوَ لا يَرضَى بِحالٍ أبَدا |
لا بِضيقٍ لا بِعَيشٍ رَغَدَا |
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قُتِلَ الإنسانُ ما أكفَرَهُ |
كُلَّما نالَ هُدىً أنكَرَهُ |
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نفس زين سان است ز آن شد كشتنى |
اقتُلُوا أنفُسَكُم گفت آن سَنى |
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خارِ سه سويه است هر چون كِش نِهى |
در خَلَد وز زخم او تو كى جهى |
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آتشِ ترك هوا در خار زن |
دست اندر يار نيكو كار زن |
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ب ٣٧٦- ٣٦٤ صِبا: كودكى، هوى و هوس.
مُحسن: نيكويى كننده.
چه رنجم مىشوى: چرا فراوان اندرزم مىدهى و مرا به رنج مىافكنى؟
باعِد بَينَنا: گرفته از قرآن كريم است فَقالُوا رَبَّنا باعِدْ بَيْنَ أَسْفارِنا: پروردگار ما دورى افكن ميان سفرهاى ما. (سباء، ١٩)
[١] -در حاشيه نسخه اساس: عافيت رنجور