فرهنگ فقه فارسي - موسسه دائرة المعارف الفقه الاسلامي - الصفحة ٦٣ - صَبِر
يكى از آن دو كفايت مىكند، اختلاف است. قول نخست، مشهور ميان متأخران است[٢٣]
به قول مشهور، بر مرد محرم بلند كردن صدا به تلبيه( تلبيه) مستحب است[٢٤] چنان كه بر حاجىاى كه از مكه احرام بسته، هنگام برآمدن بر وادى ابطح[٢٥]( ابطح) و نيز حاجى سوارهاى كه از مسير مدينه به مكه مىرود، هنگام رسيدن به وادى بيداء[٢٦]( بيداء) مستحب است با صداى بلند تلبيه بگويد.
( شنوايى) ( شنيدن) ( فرياد)
[١]جواهر الكلام ٩/ ٣٦٤ ـ ٣٧٠
[٢] العروة الوثقى ٥/ ٤٩٧
[٣] مسالك الافهام ٧/ ٥٦ ؛ مستمسك العروة ١٤/ ٤٨
[٤] احزاب/ ٣٢ ؛ العروة الوثقى ٥/ ٤٩٧
[٥] جواهر الكلام ٢٢/ ٤٤
[٦] ٤٣/ ٣١٦
[٧] تحرير الوسيلة ٢/ ٥٩٣
[٨] جواهر الكلام ٤٣/ ٣١٦
[٩] قواعد الاحكام ٣/ ٦٨٩ ؛ مجمع الفائدة ١٤ / ٤٤٢
[١٠] تحرير الوسيلة ٢ / ٥٩٣
[١١] وسائل الشيعة ٦/ ٢٠٨ و ٢١٠
[١٢] جواهر الكلام ٤/ ٣٢٤ ؛ العروة الوثقى ٢/ ١٢٣ ـ ١٢٤
[١٣] جواهر الكلام ٩/ ٥٦
[١٤] ١٠٨
[١٥] ١٠٩
[١٦] ١١/ ٢٤٠
[١٧] ١٢/ ١٤٦
[١٨] ١٤/ ١١١ ؛ العروة الوثقى ٢ / ٤٠٨
[١٩] حجرات / ٢
[٢٠] بحار الانوار ١٠٠/ ١٢٥ [٢١]جواهر الكلام ٨/ ٢٦٩
[٢٢] ١١/ ٥٢ ـ ٥٤
[٢٣] الحدائق الناضرة ١١/ ٤٠٤ ـ ٤٠٨ ؛ جواهر الكلام ١٤/ ٢٨٥ ـ ٢٨٨
[٢٤] جواهر الكلام ١٨/ ٢٧٢
[٢٥] ٢٨٢
[٢٦] ٢٧٨ ؛ تذكرة الفقهاء ٧/ ٢٥٥ .
صُداع سردرد
صداق مَهر
صدر سينه
صدع
صَدع: شكافتن و ترك برداشتن جسم سخت، مانند استخوان[١]
از احكام آن در باب ديات سخن گفتهاند.
به قول مشهور، ديه ترك برداشتن استخوان، به گونهاى كه منجر به از كار افتادن آن گردد، دو سوم ديه آن عضو است و در صورت بهبود بدون عيب و كجى، ديهاش چهار پنجم ديه صورت پيشين خواهد بود[٢]
[١]لسان العرب، واژه «صدع»
[٢] مبانى تكملة المنهاج ٢/ ٣١٨ ـ ٣١٩ .
صدغ
صُدغ] = شقيقه]: گيجگاه؛ قسمت بالاى دو طرف سر؛ ميان گوش وگوشه خارجى چشم.