احوال و آثار مير سيد على همدانى (با شش رساله از وي) - رياض، محمد - الصفحة ٤١٨ - و لو نال فدم القوم لثم فدامها - لا كسبه معنى شمايلها اللثم
[و يكرم من لا يعرف الجود كفه- و يحلم عند الغيظ من لاله الحلم]
قال (رحمة اللّه[١]):
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و يكرم من لا يعرف (الجود[٢]) كفه |
و يحلم عند الغيظ من لاله الحلم |
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فاعل يكرم من است در من (لا يعرف[٣]) و فاعل يحلم من است در من (لا الحليم[٤]) و (كف[٥]) فاعل (يعرف[٦]) چون تأثيرات خواص شراب معنوى مواقع تصرفات سرى و قلبى را از ظلمات اخلاق حرص و بخل و ادناس اوصاف كبر و عجب كه از لوازم صفات بهيمى و سبعىاند در مقام (تخليه و تزكيه[٧]) مزكى و و مصفامى گرداند. باز در مقام (تحليه[٨]) سر وجود سالك را بحلا، جود و سخا و زيور حلم و حيا (محلى و مزين[٩]) ميگرداند و خليفه روح را در (بارگاه[١٠]) قلب برسرير روح و صفا مىنشاند.
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بباكين عاشقى از سر (گرفتيم[١١]) |
جهان خاك را در (زر[١٢]) گرفتيم |
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زمين (و[١٣]) كوه و دشت (و[١٤]) باغ جانرا |
همه در حله اخضر گرفتيم |
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زمين را از (مها را برگ و بر[١٥]) شد |
ز سرّ خويش برگ و برگرفتيم |
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[و لو نال فدم القوم لثم فدامها- لا كسبه معنى شمايلها اللثم]
قال رحمة اللّه[١٦]:
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و لو نال فدم القوم لثم فدامها |
(لا كسبه[١٧]) معنى شمايلها اللثم |
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(فدم بليد[١٨]) كند فهم را گويند و فدام دهان بند خم و (لثام دهان[١٩]) بند
[١] - رحمه اللّه عليه.
[٢] - الوجود.
[٣] - لا لعرف.
[٤] - لاله الحلم.
[٥] - كفه.
[٦] - من لا يعرف. يعنى
[٧] - تزكيه و تجليه.
[٨] - تجليه.
[٩] - مزبن و محلى.
[١٠] - بار.
[١١] - گرفتم( در مصرع بعدى و در آخر ابيات دوم و سوم نيز به جاى گرفتيم، گرفتم آمده).
[١٢] - بر.
[١٣] - ندارد.
[١٤] - ندارد.
[١٥] - بهاران برگ پر.
[١٦] - عليه.
[١٧]- لا كشبه.
[١٨]- قدم پديد.
[١٩]- لشام وهان.