توضيح الأسناد المشكلة في الكتب الأربعة - الشبيري الزنجاني، السيد محمد جواد - الصفحة ٤١١
موسى، علل الشرائع ٢: ٤٥٨/ ٢ بسنده عن معاوية] و في: ٣٦٤/ ٥ ما يشبه القطعة المتقدّمة من بعض الجهات.
: ٣٨١/ ٣ [التهذيب ٥: ٣١٥/ ١٠٨٥ عن الكافي ظاهراً، ٣٧٠/ ١٢٨٨ عن موسى] ٣٨٢/ ١٠، و قريب منه في: ٣٩٣/ ٥ [لاحظ التهذيب ٥: ٣٥٥/ ١٢٣٢، ذيل الرواية] ٣٩٥/ ٤، ٤٠٠/ ٤ [عنه التهذيب ٥: ٩٧/ ٣١٩]، ٣٩٨/ ٤، ٣٩٩/ ١ [التهذيب ٥: ٩٤/ ٣٠٩ عن موسى]، ٤٠١/ ١ [عنه التهذيب ٥: ١٠١/ ٣٢٩]، ٤٠٦/ ١ [التهذيب ٥: ١٠٤/ ٣٣٩ عن موسى [١]]، (* التهذيب ٥: ١٥٤/ ٥٠٩، و «يقضي» فيه مصحّف «تقضي» كما في الاستبصار ٢: ٢٤١/ ٨٤١ و الفقيه ٤: ٣٥٨/ ٥٧٦٢).
: ٤١١/ ٥ [عنه التهذيب ٥: ١٠٧/ ٣٤٩- و عن التهذيب في السرائر:
٦٣١- و ١٠٤/ ذيل الحديث ٣٣٩ عن موسى]، ٤٢٣/ ١ [عنه التهذيب ٥: ١٣٦/ ٤٥٠، ٢٨٦/ ٩٧٣، و صدره في ٥: ١٣٦/ ٤٤٨، و أكثره في:
١٠٤/ ذيل الحديث ٣٣٩ عن موسى]، (* التهذيب ٥: ١٤٣/ ٤٧٥ عن موسى، و في: ٢٨٥/ ٩٧٠ إشارة إليه)، ٤٢٩/ ١٤ [عنه التهذيب ٥: ١٣٥/ ٤٤٥، الفقيه ٢: ٤١١/ ٢٨٤٠ معلّقاً، الخصال ٢: ٦٠٢/ ٨ بسنده عن معاوية]، (* الفقيه ٢: ٤١٢/ ٢٨٤٦)، ٤٣٠/ ١ [عنه التهذيب ٥: ١٤٤/ ٤٧٦]، (* الفقيه ٢: ٤٠٦/ ٢٨٢٩ و ٤٦٠/ ٢٩٦٨)، ٤٣١/ ١، ٤٣٤/ ٦ [التهذيب ٥: ١٤٨/ ٤٨٧ عن موسى]، ٤٣٨/ ١ [عنه التهذيب ٥: ١٥٧/ ٥٢١، الفقيه
[١]- في الرواية زيادات كثيرة ورد بعضها في الكافي ٤: ٤١٠/ ٤، و بعضها ذكرناها في موضعها من الكافي.