عرفان اسلامى تفسير مصباح الشريعه و مفتاح الحقيقه - انصاريان، حسين - الصفحة ٣٤٣ - پنجاه صفت مؤمن
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خارج همه از اداره قطب |
با قطب برادر سبيلند |
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هم مالك ملكت سليمان |
هم صاحب ثروت خليلند |
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دارند به حق هزار برهان |
خاموش ولى زقال و قيلند |
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در مملكت وجود باقى |
بعد از انبيا بىبديلند |
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در مصر ولايتند والى |
يوسف رخ و دلبر و جميلند |
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اكسير سعادتمند افراد |
پر قيمت و قابل و قليلند |
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از خلق نه از عروق و اعصاب |
برخاتم انبيا سليلند |
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داود زبور خوان توحيد |
با كوه به نغمه هم رسيلند |
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آنان كه لباس جاه پوشند |
در فقر برهنه و ذليلند |
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بينند حجارههاى سجيل |
كاين قوم ضلال قوم پيلند |
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نابرده به كعبه فنا پى |
بر نفى بقاى خود دخيلند |
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آن فرقه كه زندهاند دايم |
در مسلخ عشق او قتيلند |
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خلاق معانيند و صورت |
امرند كه خلق را كفيلند |
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قوت دل اولياست تهليل |
با خاتم انبيا اكيلند |
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بر مسند حق خليفة الله |
غوثند و خداى را وكيلند |
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از اسم گذشته در يم ذات |
مستغرق بلكه مستحيلند |
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ايجاد عيال جود افراد |
هم لم يلدند و هم معيلند |
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بحرند كه حاوى لآلى |
ابرند كه راوى غليلند |
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هستى است زجودشان وايشان |
در معرض امتحان بخيلند |
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