قراضه طبيعيات - ابن سينا - الصفحة ٣٠ - باب سيزدهم
يعنى آن بيناد [١] كه بدان شاد گردد [٢] و ضد آن [٣] نيز گويند أسخن [٤] اللّه عينه [٥] يعنى غمگين باد كه آب چشم او گرم باشد. [٦]
باب سيزدهم
[٧]- چراست كه نكهت مردم گرم باشد و چون بدمد سرد باشد [٨].
جواب [٩]- از بهر آنك [١٠] نكهت دخانى [١١] است و از [١٢] دل همىآيد [١٣] كه معدن حرارت است لابد گرم باشد و چون از دهان [١٤] بيرون آيد و [١٥] دورتر برود [١٦] كه هوا يابد [١٧] سرد شود [١٨] و چون بدميدن باشد
[١] - س: بينايش.
[٢] - س: گردى ...
[٣] - ت و م: اين.
[٤] - س: سخن.
[٥] - س: عينى خصمك يعنى گرم گرداناد خداى دو چشم ترا يعنى آب چشم او گرم باد.
[٦] - س: عينى خصمك يعنى گرم گرداناد خداى دو چشم ترا يعنى آب چشم او گرم باد.
[٧] - م و ت: يج.
[٨] - ت: گردد.
[٩] - م: ج. ت اين كلمه را ندارد.
[١٠] - ت: آنكه.
[١١] - م: دمانى.
[١٢] - س: كه از.
[١٣] - س: برمىآيد.
[١٤] - س: دهن.
[١٥] - اين حرف از نسخه م افتاده است.
[١٦] - م: بود. س: شود.
[١٧] - س: بايد.
[١٨] - ت: گردد.