لهوف منظوم یا معارج المحبة (منظوم فارسی لهوف) - سید بن طاووس - الصفحة ٥٨ - برير بن خضير و ميدان رفتن او
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به بالين شد كه آخر زمانش |
پذيرا گشت از نو ميهمانش |
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ز شوق از پرده دل داد آواز |
كه هذا جدّك اى شاه سرافراز |
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پرستاران عشق آن خسته را زود |
بياوردند نزد شاه ذيجود |
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غبار از چهره رفتش، دست لولاك |
چه بودار بودمى من جاى آن خاك |
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همى فرمود سلطان لعمرك |
و أنت الحر كما سمّتك أمّك |
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شبيه احمد آن مولاى يوسف |
همى فرمود از روى تاسّف |
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لنعم الحرّ حرّ بني رياح |
صبور عند مختلف الرّماح |
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برير بن خضير و ميدان رفتن او
(١)
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چو شد آن شيره شور محبّت |
برون از اين جهان پر ز محنت |
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برير بن خضير از آن خضر پيمان |
سكندرسان روان شد سوى حيوان |
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سمند افكند در ظلمات پيكار |
دليلش گشت شمشير گهربار |
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به تيغ تيز آن پر شور و بيباك |
گروهى را فكند از باره بر خاك |
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ز كرز و نيزه و شمشير دشمن |
شكستش مغفر و بدريد جوشن |
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تنش در جنبش آمد جان به پرواز |
سلام آورد بر سلطان سرباز |
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گذشت از خويش و اين عيش مكدّر |
گرفته از دست خواجه خضر ساغر |
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