فرسان الهيجاء - المحلاتي، الشيخ ذبيح الله - الصفحة ٣٩٦ - عليّ الأصغر الرضيع
مباراة الشعر أو تقريب معناه بالعربيّة :
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حين لم يبق سوى الطفل الرضيع |
وهو في الأخلاق كالجدّ الشفيع |
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غُذّي الفضل بثدي فاضل |
شاده الله على كلّ رفيع |
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يستمدّ الكون من أنفاسه |
ذاته فانظر إلى حسن الصنيع |
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ولئن سمّي طفلاً إنّه |
مشبهٌ كلّ وليّ ومطيع |
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ولقد نادى غريباً مفرداً |
صابراً بالطفّ خلّاه الجميع |
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يمّم المهد لكي تحملني |
أنصر الحقّ على رجس وضيع |
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حيث لم يبق له من ناصر |
غير طفل إنّه أمر مريع |
ويقول عمّان الساماني الإصفهاني
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خوش ره آوردى بدان درگاه برد |
بر سر دستش بنزد شاه برد |
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کى شه اين گوهر به استسقاى توست |
خواهش آبش زخاک پاک توست |
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وه چه طفلى ممکنات او را طفيل |
جمله يكسر کائنات او را بديل |
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کودکى در دامن مهرش بخواب |
سه ولد با چار مام وهفت باب |
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اشرف اولاد آدم را پسر |
ليك اندر رتبه آدم را پدر |
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ارفع المقدار من کلّ رفيع |
الشفيع ابن الشفيع ابن الشفيع |
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دُرّئ التاج آن گرامى گوهران |
آن سبک در وزن ودر قيمت گران |
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ظاهراً از تشنگى بى تاب بود |
باطناً سرچشمه هر آب بود |
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بر اميد جان نثارى آن زمان |
خويش را افکند از مهدِ امان |
مباراة الشعر أو تقريب معناه بالعربيّة إلّا بيت واحد لم ألم بمعناه :
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کودکى در دامن مهرش بخواب |
سه ولد با چار مام وهفت باب |