ثمرات الأعواد - الهاشمي الخطيب، علي بن الحسين - الصفحة ١٠٨ - المطلب التاسع عشر في كيفية خروج موسى من مدينة فرعون و
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لا چن لوله ما ينزل |
امن الباري العهد لحسين |
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ناداه الوعد وينه |
او گال انچان هذا الدين |
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أبد ما يستقيم الّه بچتلي |
اخذيني يا سيوف الحين |
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يسيوف العده او دارت |
عليه أو كل كتر ملزوم |
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حاطت بيه بس ترميه |
بحجار او نبل وسهام |
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هذا ايطعنه بالخطي |
او ذاك ايضربه بالصمصام |
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حال العطش عن شوفه |
او عن الماي بالطّف صام |
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من كثر النبل والزان |
ما يگدر يولي ايگوم |
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الف وتسعميت اصواب |
المثلث مرد گلبه |
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او وگع للگاع ابو اليمه |
وعليه الدينا منجلبه |
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گطع راسه الشمر بالسيف |
او فزعوا كلهم السلبه |
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او لامت حربه سلبوها |
او عليه ما تركو من اهدوم |
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عليه ما تركو من ثياب |
وموسد على التربان |
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ورضّت خيلهم جسمه |
او راسه على سنان اسنان |
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ظل عاري ثلث تيّام |
ابلياليها او گضه عطشان |
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او ماي العذب مهر امّه |
او من عنده انچتل محروم |
(تخميس)
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أيقتل ضمآناً حسين بكربلا |
وفي كل عضو من أنامله بحر |
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ووالده الساقي على الحوض في غد |
وفاطمةُ ماء الفرات لها مهرُ |