ماهنامه موعود - مؤسسه فرهنگى هنرى موعود عصر - الصفحة ١١ - بيا
اى خوبترين نگاه عرفان
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ابر آمد و خندهةاى باران |
بىزلف بنفشه و بهاران؟ |
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تو دامن سبز خنده دارى |
اى چشم گعهر فشان باران |
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افسرده دلى كه بى غم توست |
پژمرده سرى كه جست سامان |
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هم آينه دل بهارى |
هم رونق فصل گرم تابان |
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دلشوره مردگان بىغسل |
آهنگ عزاى روز هجران |
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پيچيده به خود گليم غيبت |
مزمّل بخت جنّ و انسان |
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بىفلسفه تو زندگى پوچ |
اى خوبترين نگاه عرفان |
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آهوى رميده سعادت |
هرگز نشود چنين خرامان |
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بىبرگى من مبين كه در باغ |
بس شاخه زرد و خشك و بىجان |
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هانً آتش غم فرو نشاندند |
مردان عزا گرفته نان! |
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موعود! بيا كه وعده جاريست |
مستور چرا؟ سوار ميدان |
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اى قصّه شاد مثنوىها |
موعود زمان، مقام قرآن |
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كورىّ نگاه ديو ملحد |
بىپرده بخوان نواى يزدان |
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شكرى كه شكايتش بيندود |
اندوه دل است و شادى جان |
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آن زخمه كه تار جان نوازد |
غيبتكده را كنند چراغان |
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زخم غم آتشين هجر است |
شمع رخ توست، شاه خوبان! |
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اين جامه سيه هميشه ماند |
تا روى تو از زمانه پنهان |
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در زلف تو آشيانه كرده است |
آن موج آن گره گشاى ايمان |
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نوشنده جرعهخوار جامت |
مانند ابد، بسى فراوان |
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پايان تو، خفتن وجود است |
آغاز تو را كجا و پايان |