ماهنامه موعود - مؤسسه فرهنگى هنرى موعود عصر - الصفحة ٤٠ - شستشو
هجرنامه
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ز كعبه عزم سفر كن، به اين ديار بيا! |
چو عطر غنچه نهان تا كى؟ آشكار بيا! |
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حريم دامن نرجس شد از تو رشگ بهار |
گل يگانه گلزار روزگار، بيا! |
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تويى، تو نور محمد، تو جلوه يى ز على |
تو سيف منتقمى، عدل پايدار بيا! |
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ز اشك و خون دل، اين خانه شستشو داديم |
بيا به مشهد عشاق بيقرار! بيا! |
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زمان، گذرگه پژواك نام نامى تست |
زمين ز راى تو گيرد مگر قرار، بيا! |
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ميان شعله غم سوخت هجرنامه ما |
بيا كه گويمت آن رنج بيشمار، بيا! |
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زلال چشمه تويى، روح سبزه، رمز بهار |
بيا كه با تو شود فصلها، بهار بيا! |
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براى آنكه نشانى تو اى مبشر نور |
درخت خشك عدالت به برگ و بار، بيا! |
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براى آمدنت، گر چه زود هم ديرست! |
شتاب كن كه برآرى ز شب دمار، بيا! |
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بيا كه دشت شقايق به داغ، آذين گشت |
تو اى تسلى صحراى سوگوار، بيا! |
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حريق فاجعه، گلهاى عشق مى سوزد |
فرو نشان به قدوم خود اين شرار، بيا! |
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بتاب از پس دندانه هاى قصر سحر |
بزن حجاب به يكسو، سپيده وار بيا! |
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نگاه منتظرانت فسرد و، مى ترسم |
كه پژمرد همه گلهاى انتظار، بيا! |
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زدند خيمه، سپاه تو بر صحارى عشق |
براى يارى شيران شب شكار بيا! |
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ز شعله پر پروانه ها چراغان شد |
زمين شب زده، اى مهر ماندگار بيا! |
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فشانده ايم، به راهت بسى شكوفه خون |
به كربلاى غريبان اين ديار بيا! |
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تويى تو، وارث خون شهيد اى گل نور! |
قسم به غربت سنگر، مسيح وار بيا! |
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نشسته ديده درماندگان دهر، به راه |
هماى ساحل درياى انتظار، بيا! |
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به انتظار تو تا كى، طلايهدار بهار؟! |
تو اى قرار به دلهاى بيقرار بيا! |
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خوش آن زمان كه تو باشى خطيب جمعه ما |
خوش آن زمان كه تو شويى ز دل غبار، بيا! |
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چه نارساست كلامم كه زان عظيمترى |
تو اى عصاره قرآن به كوله بار، بيا! |
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اميد آنكه بيايى و در قدم قدمت |
(سپيده) اشك و گل جان كند نثار، بيا! |
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دلم ز هجر تو ويرانه شد، ز پرده بتاب |
چو مه ببخش به ويرانه، اعتبار بيا! |
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قسم به عصمت كوثر، هلا طليعه صبح! |
قسم به سوختگان اميدوار، بيا! |
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قسم به اشك يتيمان بيا! بيا مهدى! |
قسم به حسرت دلهاى داغدار، بيا! |